8th pay commission – 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और कर्मचारियों के बीच उत्सुकता बढ़ती जा रही है। यह आयोग केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई सैलरी स्ट्रक्चर तय करेगा। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार की कुछ शर्तें आयोग के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं। जहां कर्मचारी महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार वित्तीय भार को नियंत्रित रखने पर जोर दे रही है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया काफी जटिल मानी जा रही है क्योंकि इसे कर्मचारियों के हित और आर्थिक स्थिरता दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोग 2026 तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है, जिसमें बेसिक पे, ग्रेड पे और एरियर भुगतान जैसे प्रमुख बदलाव शामिल हो सकते हैं।

8वें वेतन आयोग की प्रमुख सिफारिशें तैयार करने में कठिनाई
8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसे कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की आर्थिक सीमाओं के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। कर्मचारियों की तरफ से न्यूनतम वेतन में 40 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। वहीं, सरकार चाहती है कि वेतन वृद्धि चरणबद्ध तरीके से की जाए ताकि वित्तीय घाटा बढ़े नहीं। इसके अलावा, आयोग को महंगाई दर, GDP ग्रोथ और राजस्व घाटे जैसे आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखकर सिफारिशें तैयार करनी होंगी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार को बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा, इसलिए सभी सिफारिशों को बड़े ध्यान से तैयार किया जा रहा है।
सरकार की शर्तें बनीं सबसे बड़ी रुकावट
सरकार ने आयोग से कहा है कि उसकी सिफारिशें केवल राजकोषीय अनुशासन के दायरे में रहें। यह शर्त आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि कर्मचारियों के संगठन वेतन में भारी वृद्धि की मांग कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में कोई भी सिफारिश ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे सरकारी खर्च में अत्यधिक वृद्धि हो। इससे आयोग के सामने यह कठिनाई आ गई है कि कैसे कर्मचारियों की अपेक्षाओं को पूरा करते हुए सरकार की शर्तों का पालन किया जाए। यही कारण है कि आयोग को अपनी रिपोर्ट के लिए अतिरिक्त डेटा एनालिसिस और व्यावहारिक मॉडलिंग करनी पड़ रही है।
कब तक आ सकती है रिपोर्ट?
अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आयोग 2025 के मध्य तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश कर सकता है। इसके बाद 2026 की शुरुआत में अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी जाएंगी। यदि सब कुछ समय पर हुआ, तो कर्मचारियों के वेतन में संशोधन 1 जनवरी 2027 से लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट में बेसिक पे, डीए मर्जिंग, पेंशन रिवीजन और प्रमोशन पॉलिसी जैसे विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा। कर्मचारी संगठनों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे सिफारिशें आने के बाद आंदोलन या चर्चा शुरू कर सकते हैं ताकि उनकी मांगें पूरी हो सकें।
कर्मचारियों की उम्मीदें और भविष्य की संभावनाएं
कर्मचारियों को उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग से उनकी आय में बड़ी बढ़ोतरी होगी जिससे महंगाई का बोझ कम होगा। विशेष रूप से ग्रुप C और D श्रेणी के कर्मचारियों का मानना है कि न्यूनतम वेतन में पर्याप्त वृद्धि जरूरी है ताकि जीवन स्तर बेहतर हो सके। वहीं, पेंशनभोगियों की भी मांग है कि पेंशन फॉर्मूले को नया रूप दिया जाए ताकि उनकी आय नियमित रूप से महंगाई दर के साथ बढ़े।
