Government Employees Retirement Age News – हाल ही में सरकार ने कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 67 वर्ष करने का बड़ा फैसला लिया है। इस बदलाव का सीधा असर लाखों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनधारकों पर पड़ेगा। पहले जहां सेवानिवृत्ति की आयु 60 या 62 वर्ष थी, वहीं अब नए नियम के तहत इसे बढ़ाकर 67 वर्ष कर दिया गया है। इसका उद्देश्य अनुभवी कर्मचारियों के अनुभव का अधिकतम उपयोग करना और सरकारी कार्यों की गुणवत्ता को बनाए रखना है। साथ ही, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) में आना चाहते हैं, उनके लिए भी कुछ नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। इस निर्णय से जहां कर्मचारियों को अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा, वहीं वित्तीय रूप से पेंशन पर भी बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा।

67 वर्ष रिटायरमेंट नियम का मुख्य उद्देश्य
सरकार के इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य अनुभवी कर्मचारियों की सेवाओं का लाभ लंबे समय तक लेना है। कई विभागों में अनुभवी कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज पर असर पड़ रहा था। नए नियम के तहत अब कर्मचारी 67 वर्ष की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे, जिससे प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी। इसके अलावा, इससे पेंशन भार में भी अस्थायी राहत मिलेगी क्योंकि सेवानिवृत्ति की अवधि बढ़ने से सरकार को पेंशन भुगतान कुछ सालों के लिए टालने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे युवा नियुक्तियों की गति थोड़ी धीमी पड़ सकती है, लेकिन सरकारी अनुभव का लाभ प्रणाली को मजबूती देगा।
पुरानी पेंशन स्कीम पर नए दिशा-निर्देश
रिटायरमेंट आयु बढ़ने के साथ ही सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme – OPS) को लेकर भी नई गाइडलाइन जारी की है। अब ऐसे कर्मचारी जो 2004 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवाएं बीच में रोकी गई थीं, वे फिर से OPS के तहत आ सकते हैं। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस कदम से पुराने कर्मचारियों में काफी उत्साह है क्योंकि पुरानी पेंशन स्कीम उन्हें आजीवन वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होगा और वे नई पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत ही रहेंगे।
कर्मचारियों और पेंशनरों पर असर
इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ेगा। जिन कर्मचारियों की रिटायरमेंट तारीख अगले 1-2 वर्षों में थी, उन्हें अब अतिरिक्त पांच वर्षों तक सेवा देने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें वेतन वृद्धि, प्रमोशन और ग्रेच्युटी में भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा। वहीं, पेंशनरों के लिए सरकार द्वारा पेंशन वितरण के नियमों में पारदर्शिता और समयबद्धता पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से प्रशासनिक ढांचा और मजबूत होगा तथा कर्मचारियों को करियर स्थिरता मिलेगी।
भविष्य की नियुक्तियों पर प्रभाव
रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने का असर नई नियुक्तियों की गति पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में नए भर्ती पदों की संख्या में अस्थायी कमी आ सकती है क्योंकि मौजूदा कर्मचारी लंबे समय तक सेवा में बने रहेंगे। हालांकि सरकार का मानना है कि इससे विभागों को अनुभव का लाभ मिलेगा और नीतिगत फैसले अधिक सटीक होंगे। साथ ही, भविष्य में सरकार युवा उम्मीदवारों के लिए अलग स्पेशल भर्ती योजनाएं भी लाने की तैयारी कर रही है ताकि रोजगार संतुलन बना रहे। कुल मिलाकर, यह निर्णय प्रशासनिक मजबूती और अनुभव आधारित कार्यसंस्कृति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
