Retirement Planning – रिटायरमेंट की योजना बनाना हर व्यक्ति के जीवन का सबसे अहम वित्तीय निर्णय होता है। नौकरी के दौरान जितनी मेहनत से हम कमाते हैं, उतना ही जरूरी है यह समझना कि रिटायरमेंट के बाद आय का स्थायी स्रोत कैसे बनाया जाए। आज के समय में एनपीएस (National Pension System), पीपीएफ (Public Provident Fund) और ईपीएफ (Employees’ Provident Fund) जैसे तीन प्रमुख निवेश विकल्प मौजूद हैं, जो लंबी अवधि में सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय सुनिश्चित करना है, ताकि आपको भविष्य में आर्थिक चिंता न हो। हर योजना के अपने अलग फायदे और जोखिम हैं, इसलिए सही विकल्प चुनने के लिए व्यक्ति की उम्र, आय, जोखिम क्षमता और कर लाभों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

एनपीएस (NPS) में निवेश क्यों बेहतर है?
एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम एक मार्केट-लिंक्ड निवेश योजना है, जिसे भारत सरकार ने रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू किया है। इसमें निवेशक अपनी पसंद के अनुसार इक्विटी और डेट फंड का अनुपात चुन सकता है। एनपीएस में 60 वर्ष की उम्र के बाद निवेशक को 60% राशि एकमुश्त मिलती है और शेष 40% से पेंशन खरीदी जाती है। इसमें टैक्स लाभ भी मिलता है — धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक और 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 तक। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर एनपीएस में कंपाउंडिंग के जरिए बड़ा फंड बन सकता है, जो सेवानिवृत्ति के बाद स्थायी आय का साधन बनता है।
पीपीएफ (PPF) कितना सुरक्षित विकल्प है?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ एक सरकारी गारंटीड योजना है जो जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसमें निवेश की न्यूनतम अवधि 15 वर्ष की होती है, और इसे 5-5 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। पीपीएफ पर ब्याज दर सरकार द्वारा हर तिमाही तय की जाती है और यह पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि जमा राशि, ब्याज और निकासी — तीनों पर टैक्स छूट मिलती है। पीपीएफ में निवेश करने से न केवल रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित कोष तैयार होता है बल्कि यह परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी बेहद उपयोगी है। इसकी गारंटीड रिटर्न प्रकृति इसे बहुत भरोसेमंद बनाती है।
ईपीएफ (EPF) से मिलने वाले फायदे
कर्मचारियों के लिए ईपीएफ यानी एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एक अनिवार्य बचत योजना है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं। इस फंड में जमा राशि पर सरकार द्वारा तय की गई ब्याज दर से हर साल ब्याज मिलता है, जो कंपाउंड होता है। ईपीएफ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कर्मचारी के करियर के दौरान लगातार बढ़ती रहती है और रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त राशि के रूप में मिलती है। इसके साथ ही, इसमें पीएफ लोन की सुविधा और कुछ परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति भी है। यह योजना मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहद उपयोगी है।
कौन-सा निवेश रिटायरमेंट के लिए सबसे सही?
अगर आप स्थिरता चाहते हैं तो पीपीएफ सबसे अच्छा विकल्प है, जबकि ऊंचे रिटर्न के लिए एनपीएस उपयुक्त साबित हो सकता है। वहीं, नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ईपीएफ पहले से ही एक बेहतर बचत योजना है। यदि कोई व्यक्ति अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखना चाहता है, तो इन तीनों में निवेश का संयोजन सबसे समझदारी भरा निर्णय होगा। एनपीएस से उच्च रिटर्न, पीपीएफ से स्थिरता और ईपीएफ से नियमित वृद्धि — ये तीनों मिलकर एक मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं। इसलिए निवेश निर्णय लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और दीर्घकालिक लक्ष्यों का मूल्यांकन करना जरूरी है।
