8th Pay Commission में junior employees को senior से ज्यादा फायदा — salary rise का पूरा data अंदर से leak, unions ने emergency meeting बुलाई!

8th Pay Commission – 2025 में 8th Pay Commission (8वाँ पीएसी) के मसौदे से एक चौंकाने वाला डेटा लीक हुआ है, जिसमें जूनियर कर्मचारियों को वरिष्ठों की तुलना में कहीं *ज़्यादा फायदा* मिल रहा है। अनलॉकेड फाइल्स में दिखा कि लेवल 1 और लेवल 2 के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर (बैसिक वेतन पर गुणा) 1.8 से 2.46 तक प्रस्तावित है — जिससे बेसिक वेतन में **80 % से 146 % तक वृद्धि संभव है। वहीं पुराने वरिष्ठ श्रेणियों में यह लाभ अपेक्षाकृत कम दिख रहा है। इस सब के बीच, कर्मचारी यूनियनों ने इसकी गंभीर श्रेष्ठता-भेद के खिलाफ आपात बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इससे सेवा-काल व वरिष्ठता पर आधारित पारंपरिक वेतन प्रगति प्रणाली स्वतः प्रभावित होगी, और ‘कम अनुभव वाले को अधिक लाभ’ वाला मॉडल उभरेगा – जिससे वरिष्ठ कर्मचारियों में रोष का माहौल बन गया है।

8th Pay Commission
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जूनियर्स को ज़्यादा लाभ क्यों मिल रहा है?

लीक बताए गए डेटा के अनुसार, लेवल 1, 2, 3 जैसे “मूल श्रेणी” के कर्मचारियों—जिन्हें हम अक्सर जूनियर कह सकते हैं—के लिए प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर काफी ऊँचा रखा गया है। उदाहरण के लिए, लेवल 1 में वर्तमान बेसिक ₹18,000 को फिटमेंट ×1.8 पर ₹32,400 तक बढ़ाया जा रहा है; वहीं ×2.46 पर यह ₹44,280 तक पहुँच सकता है।  इसका मतलब यह है कि कम ग्रेड वाले कर्मचारियों को वरिष्ठों की तुलना में  प्रतिशतानुसार काफी बड़ा उछाल मिल रहा है। इसके पीछे कारणों में कुछ शामिल बताए गए हैं: सरकार का “टैलेंट आकर्षित करना” (अधिक अनुभवहित भर्ती को आकर्षित करना) और “जूनियर स्तर से सशक्त शुरुआत” देना। लेकिन वरिष्ठ ग्रेड वालों को यह उछाल इतनी प्रबलता से नहीं मिल रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।

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वरिष्ठों में नाराज़गी व यूनियन की प्रतिक्रिया

वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों का कहना है कि इस मॉडल से उनकी वरिष्ठता-वेतन प्रगति प्रभावित होगी। यूनियनों ने कहा है कि यदि जूनियर्स को इतने बड़े लाभ दिए गए तो वरिष्ठों के मूल वेतन एवं इन्क्रीमेंट ग्राफ में समान सुधार नहीं हुआ तो असंतुलन बन सकता है। उदाहरण के तौर पर, All India Trade Union Congress (AITUC) ने बताया है कि वरिष्ठ और पूर्व कर्मचारी—विशेषकर पेंशनर्स—अभी भी नए मॉडल में उचित समावेशन नहीं देख पा रहे हैं। इस कारण यूनियनों ने आपात बैठक बुलाई है जिसमें वे इस ‘कम अनुभव वाले को अधिक लाभ’ वाले दृष्टिकोण को चुनौती दे रहे हैं तथा वरिष्ठों के हितों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।

क्या डेटा सुनियोजित है या जल्दबाज़ी में खुला?

लीक डेटा में ये संकेत दिख रहे हैं कि जूनियर ग्रेड लेवल के लिए अधिक अच्छा प्रस्ताव पहले तैयार हो गया था, जबकि वरिष्ठ ग्रेड के लिए विस्तृत समीक्षा अब भी जारी है। यह इस तथ्य से भी मेल खाता है कि 8वाँ पीएसी का फिटमेंट फैक्टर अभी तक अंतिम नहीं हुआ है और प्रस्तावित श्रेणियाँ (1.83-2.46) तक कही जा रही हैं।  यूनियनों का कहना है कि इस तरह का लीक “नीति-निर्धारक दबाव” बन सकता है और निर्णय जल्दबाजी में हो सकते हैं, जिससे वरिष्ठों के हित में असमर्थित परिणाम निकल सकते हैं। इसलिए उन्होंने इस मामले में संशोधन, पारदर्शिता और सामूहिक विचार-विमर्श की मांग की है।

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भविष्य में क्या होगा?

यह संभावना है कि 8वाँ पीएसी 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है — हालाँकि रिपोर्ट और सिफारिशों में समय लग सकता है।  यदि इस स्थिति को वरिष्ठों के पक्ष में संतुलित नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में सामूहिक विरोध, यूनियन आंदोलन और वित्तीय संसाधन पर पुनर्विचार हो सकता है। वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा यह मांग उठाई जाएगी कि जूनियर-स्नातक ग्रेड में बेहतर लाभ तो मिले, पर वरिष्ठता व अनुभव को महत्व देना नहीं छोड़ा जाए। ऐसे में नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती होगी कि वे प्रत्येक ग्रेड व अनुभव-स्तर के लिए न्यायसंगत स्ट्रक्चर तैयार करें और असमर्थन को कम करें।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.