Gold price down Today: सोना और चांदी के भाव में इस साल बड़ी गिरावट, जाने क़ीमत!!

Gold Price Down Today – भारत में सोने और चांदी के दाम में इस साल एक उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है, जिसने आम उपभोक्ताओं से लेकर निवेशकों तक को प्रभावित किया है। जहां एक ओर त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग सामान्य रूप से बढ़ती है, वहीं इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण सोने की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्पों की तलाश में थे, लेकिन आर्थिक सुधार के संकेतों और ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों ने सोने की आकर्षकता को कम कर दिया है। वहीं, चांदी जो आमतौर पर औद्योगिक मांग का बड़ा हिस्सा होती है, वैश्विक उत्पादन और मांग में उतार-चढ़ाव के कारण प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप, इस साल दोनों धातुओं की कीमतें उतार-चढ़ाव के साथ नीचे की ओर रहीं, जिससे आम लोगों के लिए आभूषण खरीदना थोड़ा आसान हो गया है, जबकि निवेशकों को रणनीतिक योजना की आवश्यकता पड़ रही है।

Gold Price Down Today
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सोने की मौजूदा कीमत और बाजार के कारक

वर्तमान समय में सोने की कीमतें पिछले महीनों की तुलना में काफी नरम हुई हैं। कई शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम में ₹800 से ₹1500 तक की कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट का एक प्रमुख कारण है अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है और उसकी मांग घटने लगती है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में ब्याज दरों को स्थिर या बढ़ाने की चर्चा ने भी सोने को निवेश के रूप में कम आकर्षक बना दिया है। भारत में आयात शुल्क और जीएसटी जैसे कर भी सोने की अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों की योजना लंबी अवधि के लिए निवेश करने की है, उनके लिए यह गिरावट एक अच्छा अवसर साबित हो सकती है क्योंकि भविष्य में कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की संभावना रहती है।

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चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी इस साल स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। चांदी की कीमतें कई जगह प्रति किलो ₹1500 से ₹3000 तक कम हुई हैं, जिसका मुख्य कारण है औद्योगिक मांग में कमी। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसी उद्योगों में चांदी का उपयोग अधिक होता है, और वैश्विक बाजार में उत्पादन व आपूर्ति की स्थिति इसके दाम को प्रभावित करती है। इस साल कई देशों में विनिर्माण गतिविधियां धीमी पड़ने के कारण चांदी की मांग घटी, जिससे कीमतों में बदलाव देखने को मिला। हालांकि, भारत में चांदी का उपयोग विवाह और धार्मिक अवसरों में भी होता है, जिससे घरेलू मांग स्थिर बनी रहती है। निवेशक चांदी को सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव वाला कमोडिटी मानते हैं, इसलिए निवेश करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है।

सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस समय आपके लिए एक अच्छा मौका हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी हमेशा प्रमाणित और विश्वसनीय ज्वेलर से की जाए, ताकि शुद्धता और वजन को लेकर किसी भी प्रकार की समस्या न आए। 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में अंतर समझना और हॉलमार्क की जांच करना बेहद जरूरी है। वहीं, चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता और ग्राम-वजन को ध्यान में रखें। यदि आप निवेश उद्देश्य से धातु खरीद रहे हैं, तो फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड बॉन्ड, ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि इनमें रखरखाव और सुरक्षा से संबंधित परेशानियां कम होती हैं।

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आने वाले दिनों में कीमतों का रुझान कैसा रहेगा?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में हल्का-फुल्का उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्थिक स्थिरता बढ़ती है और ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो धातुओं की कीमतों में दुबारा तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, त्योहारों और विवाह के सीजन में घरेलू मांग बढ़ने से भी कीमतों में ऊपर की ओर हलचल हो सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की स्थितियों पर नजर रखें और जल्दबाजी में निर्णय न लें। लंबी अवधि में सोना अब भी एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी उद्योगों में वापसी के साथ तेजी पकड़ सकती है।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.