Gold price down Today – सोना और चांदी के भाव में इस साल बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है, जिसके चलते निवेशकों और आम ग्राहकों के बीच काफी चर्चा बनी हुई है। बीते कुछ महीनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की अटकलों और क्रूड ऑयल की अनिश्चितता का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। जहां सोना पहले 65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं अब इसमें लगातार नरमी देखने को मिल रही है। इसके साथ ही चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है, जो पहले 75,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी थी, पर अब इसमें भी कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2025 में आर्थिक संकेतकों और बाजार की चाल के मुताबिक सोने-चांदी में निवेश करने वालों को सावधानी बरतनी होगी।

सोने की कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे पहले, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की घोषणा ने सोने पर दबाव बढ़ाया है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें सोने में निवेश को कम आकर्षक बनाती हैं। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती भी सोने की कीमतों को नीचे धकेलने का काम करती है, क्योंकि सोना अक्सर डॉलर के उलट दिशा में चलता है।
चांदी की कीमतों में तेज गिरावट के पीछे का कारण
चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट का मुख्य कारण उद्योगों में मांग का कम होना और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का प्रभावित होना है। चांदी केवल आभूषणों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में भी बड़े पैमाने पर उपयोग होती है। लेकिन हाल ही में उद्योगों में उत्पादन की गति धीमी होने से चांदी की मांग में कमी देखी गई है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चैन के सुधरने और निर्यात में बढ़ोतरी के कारण भी कीमतों में नरमी आई है। निवेशक चांदी को सोने की तुलना में अधिक अस्थिर मानते हैं, इसलिए मामूली बाजार उतार-चढ़ाव से भी चांदी के भाव में तेज बदलाव देखने को मिलता है।
निवेशकों के लिए मौजूदा स्थिति में क्या करना फायदेमंद?
यदि आप एक निवेशक हैं और सोने या चांदी में निवेश करने का विचार कर रहे हैं, तो मौजूदा कीमतों की गिरावट आपके लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकती है। हालांकि, जल्दबाज़ी में निवेश करने की बजाय बाजार की स्थिति, वैश्विक संकेतकों और विशेषज्ञों की राय को ध्यान से समझना जरूरी है। विशेषज्ञों की मानें तो सोने में दीर्घकालिक निवेश हमेशा लाभदायक रहता है, क्योंकि यह आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा प्रदान करता है। वहीं चांदी उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है जो कम अवधि में उच्च रिटर्न की संभावनाओं पर विश्वास रखते हैं। इस समय खरीदारी करने वालों को छोटे-छोटे चरणों में निवेश करना चाहिए, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम पड़े।
आने वाले महीनों में सोने-चांदी की कीमतों का अनुमान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में फिर से हल्का उछाल देखने को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्थिक स्थिरता आती है और डॉलर की मजबूती में कमी आती है, तो सोने की कीमतों में तेजी लौट सकती है। वहीं चांदी की कीमतें भी औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होने पर दोबारा मजबूत हो सकती हैं। त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान घरेलू मांग बढ़ने की भी संभावना है, जिससे कीमतों में उछाल आ सकता है। हालांकि, निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाओं, शेयर बाजार की गतिविधियों और ब्याज दरों में बदलाव पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
