CIBIL Score Rules 2025: अब 0 स्कोर पर भी मिलेगा लोन, इतनी बड़ी खुशखबरी पहले कभी नहीं

CIBIL Score Rules 2025 – CIBIL स्कोर को लेकर हर व्यक्ति के मन में एक चिंता रहती थी कि यदि उसका स्कोर कम है या फिर ज़ीरो है, तो उसे बैंक और NBFC से लोन मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। लेकिन 2025 के नए नियमों के तहत यह स्थिति बदलती नज़र आ रही है। अब सरकार और वित्तीय संस्थानों ने यह समझा है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास ट्रांजैक्शन हिस्ट्री तो है, लेकिन नियमित क्रेडिट हिस्ट्री नहीं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों, नए नौकरीपेशा युवाओं और छोटे दुकानदारों को इससे काफी राहत मिलेगी। अब ज़ीरो CIBIL स्कोर वाले लोगों को भी एक विशेष मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत लोन दिया जाएगा। इसमें बैंक उनके बैंक स्टेटमेंट, आय स्रोत, UPI लेन-देन और आधार आधारित फाइनेंशियल प्रोफाइल का विश्लेषण करेंगे। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो पहली बार लोन लेने की सोच रहे हैं।

CIBIL Score Rules 2025
CIBIL Score Rules 2025

नए नियम क्या कह रहे हैं?

2025 के नए CIBIL नियमों के अनुसार, बैंक अब केवल क्रेडिट स्कोर पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि लोन प्रदान करने में अन्य कई मानदंडों का उपयोग करेंगे। पहले जहां लोन अप्रूवल में केवल CIBIL स्कोर का ही महत्व होता था, वहीं अब व्यक्ति की मासिक आय, उसके खर्च पैटर्न, डिजिटल लेन-देन और समय पर बिल भुगतान की प्रवृत्ति को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। खासकर UPI भुगतान और बैंक खातों में नियमित लेन-देन को एक पॉजिटिव संकेत के तौर पर देखा जाएगा। इस नियम से छोटे शहरों और गांवों के लोग, जिनका क्रेडिट स्कोर ज़ीरो या कम है, अब लोन आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। इसके कारण वित्तीय शामिलीकरण (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा।

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किन लोगों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा?

इन नए नियमों का सबसे ज़्यादा फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो पहली बार नौकरी शुरू कर रहे हैं और पहली बार लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसके अलावा वे छोटे व्यापारी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा और किसान जिनका अभी तक कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था, अब आसानी से लोन प्राप्त कर सकेंगे। पहले ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कई महीनों तक क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर स्कोर बढ़ाना पड़ता था। लेकिन अब UPI एवं बैंक स्टेटमेंट ही एक मजबूत वित्तीय प्रोफाइल साबित होंगे। यह बदलाव खासकर “New to Credit” लोगों को लक्ष्य बनाकर किया जा रहा है।

लोन प्रक्रिया में क्या होगा बदलाव?

नई प्रक्रिया के तहत बैंक अब CIBIL रिपोर्ट के साथ-साथ e-KYC और Digital Financial Behaviour को प्रमुखता देंगे। बैंक सीधे आवेदक के खाते से यह पता लगाएंगे कि वह नियमित रूप से आय प्राप्त कर रहा है या नहीं, उसके खर्च स्थिर हैं या नहीं, और डिजिटल भुगतान करते समय क्या वह समय पर लेन-देन करता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। इससे पुराने समय की तरह दस्तावेज़ों और गारंटर की जरूरत काफी कम हो जाएगी। इसका मतलब यह है कि लोन की मंजूरी अब पहले की तुलना में तेज़ और सरल होगी।

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क्या इससे लोन लेना आसान या जोखिम भरा होगा?

हालांकि यह नियम लोन प्राप्त करना आसान बनाते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि किसी को भी बिना जांच के लोन दे दिया जाएगा। बैंक और NBFCs इसकी जगह नए प्रकार के जोखिम आकलन (Risk Assessment) टूल्स का उपयोग करेंगे। यदि आय स्थिर नहीं है या लेन-देन अव्यवस्थित हैं तो लोन पर ब्याज दर थोड़ी अधिक हो सकती है। लेकिन सकारात्मक वित्तीय व्यवहार रखने वाले लोगों को अधिक लाभ और कम ब्याज दर मिलेगी। इसलिए, इस नियम का फायदा उठाने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति समय पर बिल भरें, बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखें और डिजिटल लेन-देन का उपयोग बढ़ाएं।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.