Government Employees Allowance – महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे का एक अहम हिस्सा है, जो बढ़ती महंगाई से कर्मचारियों की आय पर पड़ने वाले असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। हर छह महीने में सरकार इसका रिवीजन करती है, ताकि कर्मचारियों को राहत मिले। हाल ही में जारी किए गए अपडेट के अनुसार, केंद्र सरकार यह विचार कर रही है कि भविष्य में महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे बढ़ जाएगी और इसके साथ ही अन्य भत्ते जैसे HRA और TA भी बढ़ेंगे। हालांकि, फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन वित्त मंत्रालय के उच्च स्तर पर इस पर चर्चा चल रही है, जिससे सरकारी कर्मचारियों में उत्साह और उम्मीद दोनों बढ़ी हुई हैं।

महंगाई भत्ता मर्ज करने से क्या फायदा होगा?
अगर सरकार महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज करती है, तो इसका सीधा फायदा लाखों सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से न केवल HRA और अन्य भत्तों की राशि बढ़ेगी बल्कि भविष्य में मिलने वाले पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अभी महंगाई भत्ता अलग से जोड़ा जाता है, जिससे इसकी गिनती बेसिक पे का हिस्सा नहीं मानी जाती। अगर यह मर्ज होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन लगातार इस मांग को उठा रहे हैं कि 50% DA पहुंचते ही इसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए।
7th Pay Commission का नियम और भविष्य की संभावना
7th Pay Commission के अनुसार, जब भी महंगाई भत्ता 50% तक पहुंचता है, तो सरकार को इसे बेसिक पे में मर्ज करने की सिफारिश दी गई थी। अब कई राज्यों में DA 46% या उससे ज्यादा हो चुका है, और जल्द ही 50% तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में यह फैसला बेहद अहम साबित हो सकता है। अगर केंद्र सरकार यह निर्णय लेती है, तो अगले वित्त वर्ष से कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में बड़ा उछाल देखा जा सकता है। हालांकि, यह कदम सरकार के वित्तीय बोझ को भी बढ़ाएगा, इसलिए इस पर संतुलित विचार की जरूरत है।
सरकार की बैठक और कर्मचारियों की उम्मीदें
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय और कार्मिक विभाग के बीच हाल ही में हुई बैठकों में इस विषय पर चर्चा की गई है। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए अब यह कदम जरूरी हो गया है। अगर सरकार 2025 की पहली तिमाही में यह घोषणा करती है, तो यह केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी। कई कर्मचारी संगठनों ने इस विषय पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें 50% DA के बाद बेसिक में मर्ज करने की मांग की गई है।
Dearness Allowance Calculation का तरीका
महंगाई भत्ता की गणना All India Consumer Price Index (AICPI) के आधार पर की जाती है। हर महीने जारी किए जाने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि महंगाई दर कितनी बढ़ी है। उसी के आधार पर सरकार हर 6 महीने में DA बढ़ाने का फैसला लेती है। उदाहरण के तौर पर, अगर AICPI में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो DA प्रतिशत भी उसी हिसाब से बढ़ता है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का DA 46% है, और अगले संशोधन में इसे 50% तक बढ़ाने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों के बेसिक पे में मर्ज करने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
