Govt Employees Digital Attendence Update – सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब सभी सरकारी विभागों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ाना है। कई बार पाया गया था कि कर्मचारी समय पर ऑफिस नहीं पहुंचते या बिना बताए छुट्टी ले लेते हैं, जिससे जनता को असुविधा होती है। अब डिजिटल अटेंडेंस लागू होने से हर कर्मचारी की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज होगी, और अधिकारी इसे किसी भी समय मॉनिटर कर सकेंगे। यह कदम न केवल कामकाज की गुणवत्ता बढ़ाएगा बल्कि सरकारी सेवाओं की समयबद्धता को भी सुनिश्चित करेगा। सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अगले महीने तक इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करें।

डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम का उद्देश्य और फायदे
डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता और जवाबदेही को बढ़ाना है। पहले मैन्युअल अटेंडेंस रजिस्टर में गड़बड़ी की संभावना अधिक रहती थी, जिससे अनुपस्थित कर्मचारी भी उपस्थित दिखाए जाते थे। लेकिन अब डिजिटल अटेंडेंस के ज़रिए हर कर्मचारी की उपस्थिति रीयल-टाइम में दर्ज होगी। यह सिस्टम बायोमेट्रिक या फेस रिकग्निशन तकनीक से जुड़ा होगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावना समाप्त हो जाएगी। साथ ही, उच्च अधिकारी ऑनलाइन रिपोर्ट्स देख सकेंगे और समय पर कार्रवाई कर पाएंगे। यह कदम सरकारी सेवाओं को तेज़, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के विभागों में हलचल मच गई है। अब सभी मंत्रालयों, नगर निकायों, पंचायत कार्यालयों और शिक्षा विभागों को यह व्यवस्था अपनानी होगी। कोर्ट ने कहा है कि जनता को बेहतर सेवा देने के लिए सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो विभाग इस सिस्टम को लागू नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक केंद्रीय पोर्टल तैयार करे जिससे सभी कर्मचारियों की उपस्थिति का डेटा एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और चुनौतियाँ
डिजिटल अटेंडेंस लागू होने पर कर्मचारियों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ कर्मचारी इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे निगरानी का साधन बताकर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी और तकनीकी दिक्कतें भी एक चुनौती के रूप में सामने आ रही हैं। कई छोटे कार्यालयों में आवश्यक उपकरण जैसे बायोमेट्रिक मशीन या फेस स्कैनर अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सभी तकनीकी संसाधन जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।
भविष्य में होने वाले संभावित बदलाव
डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम के लागू होने के बाद सरकारी कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे कर्मचारियों की समयपालन की आदत विकसित होगी और काम की गति बढ़ेगी। सरकार आगे इस प्रणाली को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स से जोड़ने की योजना बना रही है ताकि कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन और बेहतर ढंग से हो सके। आने वाले समय में यह सिस्टम प्रमोशन, ट्रांसफर और परफॉर्मेंस रिव्यू में भी उपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ई-गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा और जनता को अधिक पारदर्शी और तेज़ सेवाएँ मिलेंगी।
